News24x7: बिना हिजाब कॉन्सर्ट करना पड़ा महंगा – ईरानी गायिका परास्तू अहमदी गिरफ्तार



ईरान में महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता को नियंत्रित करने वाले सख्त शरियत कानून लंबे समय से विवादों का केंद्र रहे हैं। हाल ही में, 27 वर्षीय गायिका परास्तू अहमदी की गिरफ्तारी ने इस बहस को और तीव्र कर दिया। परास्तू ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वर्चुअल कॉन्सर्ट आयोजित किया था, जिसमें उन्होंने बिना हिजाब पहने प्रस्तुति दी। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे न केवल उनकी लोकप्रियता बढ़ी, बल्कि प्रशासन का ध्यान भी उनकी ओर खींचा।

ईरानी कानूनों के तहत, महिलाओं के लिए सार्वजनिक रूप से हिजाब पहनना अनिवार्य है। परास्तू का यह कदम न केवल कानून का उल्लंघन था, बल्कि इसे सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अपमान भी माना। वीडियो वायरल होने के बाद, परास्तू को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। उनकी गिरफ्तारी ने महिलाओं की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति के अधिकार और ईरान में लागू कठोर नियमों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।


ईरान का सख्त हिजाब कानून: नियंत्रण या परंपरा?

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ईरान में हिजाब कानून 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद लागू किया गया था। यह कानून महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में हिजाब पहनने के लिए बाध्य करता है। सरकार का तर्क है कि यह कानून इस्लामी मूल्यों और संस्कृति को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। हालांकि, इसके आलोचकों का मानना है कि यह महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर कड़ा प्रहार है।

हाल ही में, ईरानी सरकार ने इन नियमों को और सख्त बना दिया है। नए कानून के तहत, हिजाब न पहनने वाली महिलाओं को भारी जुर्माने, सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने, और यहां तक कि जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर बिना हिजाब के तस्वीरें या वीडियो पोस्ट करना भी अपराध की श्रेणी में आता है।

परास्तू अहमदी का मामला इस कानून के कड़े क्रियान्वयन का एक और उदाहरण है। उनके बिना हिजाब के प्रदर्शन ने उनके प्रशंसकों को तो प्रभावित किया, लेकिन प्रशासन ने इसे एक अपराध माना। उनकी गिरफ्तारी ने यह दिखाया कि ईरानी सरकार अब भी महिलाओं की स्वतंत्रता को नियंत्रित करने के अपने रुख पर अड़ी हुई है।


महिलाओं पर बढ़ता दबाव और नए कानूनों का असर

ईरान में महिलाओं को न केवल हिजाब कानून बल्कि अन्य कई कठोर नियमों का भी पालन करना पड़ता है। इन नियमों में महिलाओं के पहनावे, काम करने की जगह, और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर सख्त पाबंदियां शामिल हैं।

नए हिजाब कानून के लागू होने के बाद, महिलाओं पर और अधिक दबाव बढ़ गया है। सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस और सरकारी एजेंसियां महिलाओं की निगरानी करती हैं। हिजाब न पहनने पर न केवल सजा मिलती है, बल्कि महिलाओं को सामाजिक बहिष्कार का भी सामना करना पड़ता है।

परास्तू अहमदी का मामला यह दर्शाता है कि ईरानी महिलाएं अब इन नियमों से तंग आ चुकी हैं। वे बदलाव चाहती हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रही हैं। परास्तू का बिना हिजाब के प्रदर्शन एक सांकेतिक विरोध था, लेकिन इसका परिणाम उन्हें गिरफ्तार होकर भुगतना पड़ा।


महिला अधिकारों के लिए संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

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महिलाओं के अधिकारों के लिए ईरान में दशकों से संघर्ष जारी है। 2022 में महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद “महिला, जीवन, स्वतंत्रता” आंदोलन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। इस आंदोलन में लाखों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया।

हालांकि, ईरानी सरकार ने इन विरोधों को दबाने के लिए कठोर कदम उठाए। हजारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया, और कई को सजा भी दी गई। इसके बावजूद, ईरानी महिलाएं अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखे हुए हैं।

परास्तू अहमदी की गिरफ्तारी ने एक बार फिर इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे संगठनों ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि महिलाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के नाम पर दबाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

दूसरी ओर, ईरानी सरकार इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के रूप में देखती है। सरकार का कहना है कि इन कानूनों का पालन करना देश की संस्कृति और धर्म को बनाए रखने के लिए जरूरी है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या किसी देश की सांस्कृतिक परंपराओं के नाम पर महिलाओं की आजादी और अभिव्यक्ति के अधिकार को छीना जा सकता है?


परास्तू अहमदी और बदलाव की उम्मीद

ईरान में बदलाव की मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी, जो इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए दुनिया के अन्य हिस्सों से जुड़ी हुई है, अधिक स्वतंत्रता और अधिकार चाहती है। परास्तू अहमदी जैसे व्यक्तित्व इस बदलाव की आवाज बन रहे हैं।

उनकी गिरफ्तारी ने न केवल ईरानी महिलाओं को प्रेरित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी इस मुद्दे की ओर खींचा है। यह स्पष्ट है कि ईरानी महिलाएं अब बदलाव चाहती हैं और अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

हालांकि, सरकार इन आवाजों को दबाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। विरोध करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, लेकिन महिलाओं की दृढ़ता यह दिखाती है कि यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है।


निष्कर्ष

परास्तू अहमदी की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि ईरान में महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है। हिजाब कानून जैसे नियम न केवल उनकी स्वतंत्रता को सीमित करते हैं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत पहचान और अभिव्यक्ति पर भी सवाल खड़े करते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि महिलाओं की आवाज को दबाने की कोशिशें जारी हैं। लेकिन परास्तू अहमदी जैसे साहसी व्यक्तित्व इन कोशिशों को विफल करने की नींव रख रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और स्थानीय संघर्ष, दोनों ही इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे। ईरानी समाज में बदलाव की यह मांग केवल एक शुरुआत है। परास्तू अहमदी और उनके जैसे अन्य व्यक्तित्व यह दिखाते हैं कि महिलाओं की आजादी और अधिकारों की लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन यह अवश्य सफल होगी।


जय हिंद 🇮🇳

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