News24x7: RG Kar मेडिकल कॉलेज की MBBS छात्रा ने की आत्महत्या, पुलिस कर रही जांच!


कोलकाता: पश्चिम बंगाल के प्रतिष्ठित आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। छात्रा आईवी प्रसाद, जो कामरहाटी स्थित ईएसआई अस्पताल के क्वार्टर्स में अपनी मां के साथ रहती थी, को उनके कमरे में फांसी से लटका पाया गया। यह घटना सामने आने के बाद से मेडिकल समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।

पुलिस इस आत्महत्या के पीछे के कारणों की जांच कर रही है और हर एंगल से मामले को देख रही है। शुरुआती जांच में पढ़ाई का तनाव और मानसिक दबाव संभावित कारण के रूप में सामने आए हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

फोन कॉल का जवाब न देने पर हुआ खुलासा

घटना शुक्रवार रात की है, जब छात्रा अपने कमरे में अकेली थी। उसकी मां, जो खुद भी डॉक्टर हैं, ने कई बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बार-बार कॉल का जवाब न मिलने पर संदेह बढ़ा, और उन्होंने दरवाजा खटखटाया। जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, तो उन्होंने दरवाजा तोड़ दिया और बेटी को फांसी से लटका पाया।

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छात्रा को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से न सिर्फ परिवार बल्कि कॉलेज प्रशासन और सहपाठियों में भी गहरा शोक है।

सुसाइड नोट नहीं मिला, मानसिक तनाव की आशंका

पुलिस को छात्रा के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिससे आत्महत्या के पीछे की स्पष्ट वजह पता नहीं चल सकी है। हालांकि शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि छात्रा मानसिक तनाव से जूझ रही थी। मेडिकल की पढ़ाई बेहद कठिन होती है, और छात्रों पर पढ़ाई का भारी दबाव रहता है।

पुलिस ने छात्रा के दोस्तों, प्रोफेसरों और कॉलेज प्रशासन से पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि उसकी मानसिक स्थिति और आत्महत्या के संभावित कारणों का पता लगाया जा सके। जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि कहीं किसी प्रकार का व्यक्तिगत, पारिवारिक या कॉलेज से जुड़ा कोई तनाव तो इसके पीछे नहीं था।

मेडिकल छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव

मेडिकल की पढ़ाई को सबसे कठिन कोर्सों में से एक माना जाता है। यहां छात्रों को न केवल थ्योरी और प्रैक्टिकल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना होता है, बल्कि लंबी पढ़ाई, कठिन परीक्षा पैटर्न और कड़ी प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ता है।

हाल के वर्षों में मेडिकल छात्रों में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि मेडिकल छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रतिशत अन्य स्ट्रीम्स के छात्रों की तुलना में अधिक होता है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल कॉलेजों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मेंटल हेल्थ काउंसलिंग, हेल्पलाइन नंबर और मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।

पुलिस जांच जारी, परिवार और कॉलेज में शोक

छात्रा की मृत्यु से उसका परिवार सदमे में है। कॉलेज प्रशासन और सहपाठी भी इस घटना से गहरे आहत हैं। पुलिस इस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आत्महत्या के पीछे कोई अन्य कारण तो नहीं है।

इस घटना ने एक बार फिर से मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल संस्थानों को अपनी शिक्षा प्रणाली में सुधार करना चाहिए और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।


जय हिंद 🇮🇳

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