उत्तराखंड ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों की रक्षा और राज्य में सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। यह निर्णय उत्तराखंड को देश के अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल के रूप में प्रस्तुत करता है।
लिव-इन रिलेशन का पंजीकरण अनिवार्य
UCC के अंतर्गत लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि यह कदम उन महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेगा जो लिव-इन रिलेशन में रहती हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “अब कोई भी अपराधी महिलाओं के खिलाफ हिंसा करके बच नहीं पाएगा।”
यह प्रावधान उन मामलों में विशेष रूप से सहायक होगा, जहां महिलाएं लिव-इन रिलेशनशिप में रहती हैं और उन्हें कानूनी अधिकारों की आवश्यकता होती है। यह कानून महिलाओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा और उन्हें वह कानूनी पहचान देगा, जो अक्सर अनौपचारिक संबंधों में नजरअंदाज कर दी जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और उनकी गरिमा की रक्षा करना है।
महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष जोर
उत्तराखंड में UCC लागू करने का एक मुख्य उद्देश्य महिलाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। लिव-इन रिलेशनशिप में कई बार महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ता है। इस कानून के तहत महिलाओं को ऐसी स्थिति में कानूनी सहारा मिलेगा, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा।
लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का यह प्रावधान राज्य में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम है। यह न केवल महिलाओं को शोषण से बचाएगा, बल्कि उन्हें अपने रिश्ते में समान अधिकारों और सुरक्षा का अहसास भी कराएगा।

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इसके अलावा, UCC का यह प्रावधान महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर भी लगाम लगाएगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह कानून ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा और अपराधियों को दंडित करने में सहायक होगा।
समाज में समानता और कानून व्यवस्था का प्रतीक
UCC लागू करने का उद्देश्य केवल महिलाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में समानता और कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक प्रयास है। समान नागरिक संहिता लागू करना समाज के सभी वर्गों को एक समान कानून के तहत लाना है, जिससे हर व्यक्ति को न्याय और समानता मिले।
उत्तराखंड ने इस पहल के माध्यम से एक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि कैसे कानून का उपयोग सामाजिक बदलाव के लिए किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से राज्य में कानून व्यवस्था मजबूत होगी और सामाजिक असमानताओं को दूर करने में मदद मिलेगी। यह कदम समाज के हर वर्ग को एक समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास है।
UCC लागू होने से समाज में यह संदेश जाएगा कि कानून सभी के लिए समान है और कोई भी व्यक्ति अपनी सामाजिक या आर्थिक स्थिति के आधार पर इससे ऊपर नहीं है। यह पहल न केवल महिलाओं को सशक्त बनाएगी, बल्कि समाज में कानून का सम्मान बढ़ाने में भी सहायक होगी।
उत्तराखंड का आदर्श कदम
उत्तराखंड का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणा बनेगा। समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्णय उन राज्यों को प्रोत्साहित करेगा, जो अब तक इसे लागू करने से हिचकिचा रहे थे। मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि यह केवल एक कानून नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की एक बड़ी कोशिश है।

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यह पहल राज्य की सामाजिक संरचना को सुदृढ़ करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि हर नागरिक को समान अवसर और सुरक्षा मिले। उत्तराखंड में UCC का लागू होना न केवल एक प्रशासनिक निर्णय है, बल्कि यह एक नैतिक जिम्मेदारी का भी उदाहरण है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) का लागू होना महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह कानून महिलाओं को कानूनी पहचान और सुरक्षा प्रदान करेगा, जो उनके सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसके अलावा, UCC समाज में समानता और कानून के प्रति जागरूकता का संदेश देगा। यह पहल उत्तराखंड को देश के अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल के रूप में स्थापित करेगी और यह साबित करेगी कि सामाजिक और कानूनी सुधारों के माध्यम से समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।
यह कदम न केवल महिलाओं को सशक्त करेगा, बल्कि समाज के हर वर्ग को यह विश्वास दिलाएगा कि कानून और न्याय सबके लिए समान हैं। उत्तराखंड में UCC का लागू होना एक नई शुरुआत है, जो देशभर में बदलाव की लहर ला सकती है।
जय हिंद 🇮🇳
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