News24x7: मुरादाबाद में बंद जैन मंदिर का पुनरुद्धार – समाज सेवा की नई पहल


मुरादाबाद के रतनपुर कला गांव में वर्षों से बंद पड़ा एक ऐतिहासिक जैन मंदिर, अब एक बार फिर सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। यह मंदिर चार दशकों से बंद था और इसे अब पुनर्जीवित कर समाज सेवा का स्थल बनाने की योजना पर काम हो रहा है।

मंदिर का इतिहास और इसके बंद होने की वजह

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के रतनपुर कला गांव में स्थित यह जैन मंदिर कभी क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था। इसे स्थानीय समुदाय में गहरी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता था। मंदिर के स्वामी, प्रदीप कुमार जैन, ने इस स्थल का निर्माण अपने पूर्वजों की स्मृति में कराया था। लेकिन समय के साथ पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उन्हें गांव छोड़ना पड़ा। स्वामी प्रदीप कुमार के परिवार के अन्य सदस्य भी यहां से दूर चले गए, जिसके कारण मंदिर की देखभाल नहीं हो पाई और यह धीरे-धीरे बंद हो गया।

News24x7

मंदिर के बंद होने से स्थानीय लोगों में निराशा थी, क्योंकि यह न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र था, बल्कि सामाजिक कार्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि, स्वामी प्रदीप कुमार का अब यह मानना है कि मंदिर का पुनरुद्धार समय की मांग है। वे इसे एक बार फिर से सामाजिक और धार्मिक कार्यों के लिए खोलकर इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को बहाल करना चाहते हैं।

प्रशासन का सहयोग और त्वरित कार्रवाई

मंदिर के स्वामी ने इस मुद्दे को जिला प्रशासन के सामने रखा। उनकी अपील को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने इसे प्राथमिकता दी और एसडीएम बिलारी को स्थल का निरीक्षण करने भेजा। निरीक्षण के दौरान मंदिर की जर्जर स्थिति का आकलन किया गया। एसडीएम ने पूरे परिसर की फोटोग्राफी करवाई और साफ-सफाई के निर्देश दिए।

प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए मंदिर के बाहर जमा मलबा और मिट्टी हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया। साथ ही मंदिर परिसर को व्यवस्थित करने के लिए सफाई कर्मियों की एक टीम नियुक्त की गई। यह सुनिश्चित किया गया कि मंदिर जल्द से जल्द धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए तैयार हो सके।

जिलाधिकारी ने मंदिर के पुनरुद्धार को समाज हित में एक महत्वपूर्ण पहल करार दिया। उनका कहना है कि प्रशासन ऐसे सभी ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करने और उन्हें समाज सेवा के लिए उपयोग में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सामाजिक और धार्मिक उपयोग की योजना

मंदिर को एक बार फिर से खोलने का मकसद केवल इसे धार्मिक स्थल बनाना नहीं है, बल्कि इसे एक ऐसा स्थान बनाना है जो सामाजिक कार्यों के लिए भी उपयोगी हो। स्वामी प्रदीप कुमार जैन ने प्रशासन से इसे सामाजिक गतिविधियों के लिए खोलने की अनुमति मांगी है।

इस योजना के तहत मंदिर परिसर में सामूहिक प्रार्थना, धार्मिक अनुष्ठान, योग सत्र, सामुदायिक बैठकें और अन्य सामाजिक कार्यों का आयोजन किया जाएगा। यह पहल न केवल स्थानीय समुदाय को एकजुट करेगी, बल्कि मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी बनाए रखेगी। इसके अलावा, यह अन्य गांवों और शहरों के लोगों को भी आकर्षित करेगा, जिससे यह स्थान एक प्रेरणा स्थल बन सकता है।

मंदिर का पुनरुद्धार समाज के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक होगा। यह धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का माध्यम भी बनेगा।

स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया और उत्साह

मंदिर के पुनरुद्धार की खबर ने स्थानीय लोगों में खुशी और उत्साह भर दिया है। इस ऐतिहासिक स्थल का फिर से खुलना न केवल उनकी धार्मिक भावनाओं को प्रकट करता है, बल्कि उन्हें समाज के लिए कुछ करने का अवसर भी प्रदान करता है।

News24x7

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। यहां पहले धार्मिक अनुष्ठान, उत्सव और सामाजिक बैठकें नियमित रूप से होती थीं। इसके बंद होने से लोगों को एक बड़ा शून्य महसूस हुआ। अब, इसके पुनरुद्धार के साथ, वे इसे एक नई शुरुआत मानते हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि यह पहल न केवल क्षेत्र के सांस्कृतिक गौरव को बहाल करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का काम करेगी। कई लोग इसमें भाग लेने और इसे सफल बनाने के लिए स्वेच्छा से अपना योगदान देने को तैयार हैं।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है। इसका पुनरुद्धार इस बात का प्रमाण है कि कैसे इतिहास और परंपरा को संरक्षित रखते हुए समाज सेवा को प्राथमिकता दी जा सकती है। मंदिर का पुनरुद्धार अन्य गांवों और समुदायों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा, जहां ऐसे स्थलों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

मुरादाबाद के रतनपुर कला गांव का यह जैन मंदिर, जो पिछले 40 वर्षों से बंद था, अब सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के लिए तैयार हो रहा है। स्वामी प्रदीप कुमार जैन और जिला प्रशासन की यह पहल न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि समाज के लिए भी एक नई दिशा प्रदान करती है।

मंदिर का पुनरुद्धार एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि जब प्रशासन, समाज और व्यक्तिगत प्रयास एक साथ मिलते हैं, तो ऐतिहासिक स्थलों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास से जोड़ने और सामाजिक परिवर्तन में योगदान करने के लिए प्रेरित करेगी।

यह केवल मंदिर के पुनरुद्धार की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक ऐतिहासिक स्थल समाज सेवा और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र बन सकता है।


जय हिंद 🇮🇳

News24x7


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *