बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत अक्सर अपने बयानों और फिल्मों के जरिए चर्चा में रहती हैं। इस बार वह फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने इसे एक ऐसी फिल्म बताया जो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सच्चाई को उजागर करने का जरिया है।
कंगना ने यह भी कहा कि यह फिल्म भारतीय राजनीति के एक काले अध्याय पर आधारित है और हर भारतीय को इसे अपने परिवार के साथ जरूर देखना चाहिए। उनका दावा है कि यह फिल्म दर्शकों को न केवल घटनाओं से परिचित कराएगी, बल्कि उन्हें सच्चाई और राजनीति के आपसी संबंधों को भी समझने में मदद करेगी।
“सच छुपाने का खेल दिखाती है यह फिल्म”


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कंगना ने ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की कहानी को “सच को उजागर करने वाला साहसिक कदम” बताया। उनके अनुसार, यह फिल्म 2002 के गुजरात दंगों और उससे जुड़े तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस शासनकाल के दौरान सच्चाई को दबाने और घटनाओं को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश की गई।”
फिल्म के जरिए यह दिखाया गया है कि किस तरह सत्ता के लिए निर्दोष लोगों की जानें गईं और राजनीतिक लाभ के लिए उनकी पीड़ा का इस्तेमाल किया गया। कंगना ने अपने बयान में कहा कि यह फिल्म उन साजिशों और षड्यंत्रों को उजागर करती है, जो भारतीय राजनीति को कलंकित करते हैं।
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक आईना है, जो उस दौर की राजनीति और घटनाओं को सामने लाता है।”
कंगना का परिवारों के लिए संदेश

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कंगना रनौत ने अपने बयान में यह भी कहा कि हर भारतीय को यह फिल्म अपने परिवार के साथ देखनी चाहिए। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक और शिक्षाप्रद फिल्म बताया।
उन्होंने कहा, “यह फिल्म केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि यह इतिहास की सच्चाई को दर्शाती है। यह दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगी कि कैसे सत्ता और राजनीति निर्दोष लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित करती है।”
उनके अनुसार, यह फिल्म केवल दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए नहीं बनाई गई है। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि कैसे सत्ता के लालच में राजनीतिक ताकतें जनता के विश्वास के साथ खेलती हैं।
कंगना ने यह भी कहा कि यह फिल्म युवाओं और परिवारों के लिए एक सीख है, जो उन्हें राजनीति की जटिलताओं और उसके प्रभावों को समझने में मदद करेगी।
बीजेपी का समर्थन और कांग्रेस पर सवाल
कंगना के बयान से यह साफ है कि बीजेपी इस फिल्म का इस्तेमाल कांग्रेस पर हमला करने के लिए कर सकती है। फिल्म के जरिए 2002 के गुजरात दंगों और उस समय की राजनीतिक स्थितियों को केंद्र में लाया गया है।
कंगना ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “राजनीतिक फायदे के लिए चिताओं की आग का इस्तेमाल करना बेहद शर्मनाक है। जो नेता ऐसा करते हैं, उन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए।”
बीजेपी समर्थकों का कहना है कि यह फिल्म उन साजिशों को उजागर करती है, जिनके जरिए गुजरात दंगों के समय सच्चाई को छुपाने की कोशिश की गई। कंगना के बयान ने इस मुद्दे को और भड़काने का काम किया है।
हालांकि, कांग्रेस समर्थकों का तर्क है कि यह फिल्म एक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है और इसे एकतरफा दृष्टिकोण से बनाया गया है। लेकिन कंगना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फिल्म सच्चाई पर आधारित है।
‘द साबरमती रिपोर्ट’ का महत्व

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फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा माध्यम है जो दर्शकों को इतिहास की अनदेखी कहानियों से रूबरू कराता है।
इस फिल्म में दंगों के उन पहलुओं को दिखाया गया है, जो अब तक अज्ञात रहे हैं। फिल्म का उद्देश्य केवल सच्चाई को उजागर करना नहीं है, बल्कि यह भी दिखाना है कि कैसे राजनीतिक खेल आम जनता की ज़िंदगी को बर्बाद कर देते हैं।
फिल्म को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। जहां एक वर्ग इसे सच्चाई पर आधारित साहसिक प्रयास मानता है, वहीं कुछ लोग इसे एक राजनीतिक प्रचार का हिस्सा बताते हैं। बावजूद इसके, फिल्म ने एक जरूरी बहस को जन्म दिया है।
दर्शकों की उम्मीदें और सवाल
‘द साबरमती रिपोर्ट’ से दर्शकों को बड़ी उम्मीदें हैं। यह फिल्म न केवल अतीत के घटनाक्रम को दिखाती है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि कैसे सच्चाई को दबाने की कोशिशें की गईं।
यह फिल्म दर्शकों को उन सच्चाइयों से रूबरू कराती है, जो शायद राजनीतिक दबाव और मीडिया के प्रोपेगैंडा की वजह से अब तक सामने नहीं आ सकीं।
फिल्म निर्माताओं का कहना है कि ‘द साबरमती रिपोर्ट’ केवल दंगों की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है। यह दर्शकों को अपनी सोच और दृष्टिकोण बदलने के लिए प्रेरित करती है।
निष्कर्ष
कंगना रनौत के बयान और ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की कहानी ने देश में एक नई बहस को जन्म दिया है। यह फिल्म केवल एक घटना को नहीं, बल्कि उससे जुड़े राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं को भी उजागर करती है।
कंगना का यह कहना कि “हर परिवार को यह फिल्म देखनी चाहिए,” इसे और भी प्रासंगिक बना देता है। फिल्म के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि किस तरह सत्ता का खेल आम लोगों की ज़िंदगी को बर्बाद कर देता है।
इस फिल्म का प्रभाव दर्शकों के दिलों पर कितना गहरा होगा, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इतना तय है कि ‘द साबरमती रिपोर्ट’ ने भारतीय राजनीति और समाज के अनछुए पहलुओं को उजागर करने में एक अहम भूमिका निभाई है।
जय हिंद 🇮🇳
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