पाकिस्तान के झेलम जिले में लश्कर-ए-तैयबा का मोस्ट वांटेड आतंकी अबू कताल मारा गया है। शनिवार रात अज्ञात हमलावरों ने उसे गोली मार दी, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। अबू कताल लंबे समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था और उसके खिलाफ कई आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के पुख्ता सबूत थे। उसकी हत्या से पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के बीच बढ़ते मतभेदों की चर्चाओं को बल मिला है।
हाफिज सईद का करीबी और खूंखार आतंकी

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अबू कताल आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का करीबी था। उसे संगठन में एक प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था, जिसने कई आतंकी हमलों की योजना बनाई थी। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा है।
अबू कताल पर भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप थे, और उसकी मौजूदगी पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को शरण देने के दावों को और मजबूत करती थी। हालांकि, उसकी हत्या ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के बीच गहरे मतभेद पनप रहे हैं।
कैसे मारा गया अबू कताल?
शनिवार रात झेलम जिले में कुछ अज्ञात हमलावरों ने अबू कताल पर हमला किया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने उसे बेहद करीब से गोली मारी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे दो प्रमुख संभावनाएं हो सकती हैं:
- आतंकी गुटों के बीच आंतरिक कलह: आतंकी संगठनों के भीतर वर्चस्व की लड़ाई और आपसी दुश्मनी के कारण कई बड़े आतंकियों की हत्या हो चुकी है।
- इंटेलिजेंस ऑपरेशन: कई बार खुफिया एजेंसियां गुप्त रूप से आतंकियों को निशाना बनाती हैं ताकि उनके नेटवर्क को कमजोर किया जा सके।
अबू कताल की हत्या ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के बीच बढ़ते मतभेद सामने आ रहे हैं।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
अबू कताल की हत्या के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भारत पहले ही पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करता रहा है। अब इस घटना के बाद कई सवाल उठ रहे हैं—क्या यह आतंकी संगठनों के बीच आपसी टकराव का परिणाम है, या फिर किसी बड़े ऑपरेशन का हिस्सा?
भारतीय खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि लश्कर-ए-तैयबा इस हत्या का बदला लेने के लिए कोई नया आतंकी हमला करने की योजना बना सकता है। इस खतरे को देखते हुए सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
पाकिस्तान में आतंकियों पर बढ़ते हमले

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अबू कताल अकेला ऐसा आतंकी नहीं है जिसे पाकिस्तान में निशाना बनाया गया हो। बीते कुछ वर्षों में कई वांटेड आतंकियों की रहस्यमयी परिस्थितियों में हत्या हो चुकी है।
- अगस्त 2023 में, पाकिस्तान के कराची में अल-कायदा के एक बड़े कमांडर को गोली मार दी गई थी।
- जनवरी 2024 में, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के एक शीर्ष नेता को अफगान सीमा के पास मारा गया था।
- मार्च 2024 में, बलूचिस्तान में ISI और आतंकी संगठनों के बीच झड़पों में कई आतंकियों की मौत हुई थी।
यह घटनाएं बताती हैं कि पाकिस्तान में आतंकियों के लिए पहले की तरह सुरक्षित ठिकाने नहीं रहे। सुरक्षा एजेंसियां अब आतंकियों के ठिकानों पर निगरानी बढ़ा रही हैं, जिससे उनका बच पाना मुश्किल हो रहा है।
आतंकी संगठनों में बढ़ता अविश्वास
अबू कताल की हत्या के बाद आतंकी संगठनों में अविश्वास और असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई है। पाकिस्तान में सक्रिय कई आतंकियों को अब यह डर सता रहा है कि वे भी इसी तरह मारे जा सकते हैं।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान में कई आतंकी गुट अब आपस में ही एक-दूसरे के खिलाफ हमले करने लगे हैं। लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे संगठनों के बीच आपसी मतभेद तेजी से बढ़ रहे हैं।
इन आतंकी संगठनों के बीच बढ़ती दुश्मनी से पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
निष्कर्ष
अबू कताल की हत्या पाकिस्तान में आतंकियों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है। यह घटना दिखाती है कि आतंकी संगठनों में अब पहले जैसी एकता नहीं रही और उनके बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस घटना के प्रभावों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। अब देखना यह होगा कि यह हत्या आतंकी संगठनों के लिए कोई नया संदेश लेकर आई है या फिर यह किसी और बड़े घटनाक्रम की शुरुआत है।
जय हिंद 🇮🇳
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